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आज भी जिंदा हैं रामायाण काल के ये 7 लोग

by Aejaz
आज भी जिंदा हैं रामायाण काल के ये 7 लोग

मित्रों… अगर मैं आपको कहूं जिस रामायाण को आप बचपन से पढ़ते, सुनते और देखते आए हैं… उसके कई पात्र आज भी जीवित हैं… तो शायद आपको यकीन ना आए…

आखिर ये सच हो भी कैसे हो सकता है…! हजारों साल पहले त्रेता युग में जिन्होंने जन्म लिया वो कलयुग तक जीवित हों… ये असंभव जो लगता है… लेकिन मित्रों ये बिलकुल सच है…

और आज मैं इस वीडियो के माध्यम से आपको रामायाण काल के ऐसे 7 लोगों के बारे में बताने जा रहा हूं… जो जीवित हैं… और कहीं पहाड़ की कंदराओं में रह रहे हैं…

तो मित्रों नमस्कार औऱ स्वागत है आप सभी का एक बार फिर the divine tales पर… रामायाण काल के जिन 7 लोगों के बारे में आपको बताने जा रहा हूं… उनमें सबसे पहले आते हैं… महाशक्तिमान, महाज्ञानी और भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी…   

1. हनुमान जी

भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार महाबली हनुमान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अमरता का वरदान माता सीता ने दिया था… वाल्मीकि रामायण के अनुसार लंका में बहुत ढूढ़ने के बाद भी जब माता सीता का पता नहीं चला तो हनुमानजी उन्हें मृत समझ बैठे… लेकिन फिर उन्हें भगवान श्रीराम का स्मरण हुआ और उन्होंने पुन: पूरी शक्ति से सीताजी की खोज प्रारंभ की…

इसके बाद वो माता सीता से अशोक वाटिका में मिले… उस समय ही माता सीता ने हनुमान को अमरता का वरदान दिया था… यही कारण है कि रामायण काल में जन्मे भगवान हनुमान सैकड़ों साल बाद ना सिर्फ महाभारत काल में जिंदा थे… बल्कि आज भी जिंदा हैं… और हिमालय के जंगलों में रहते हैं…

2. विभीषण

मित्रों हनुमान जी के अलावा रावण के अनुज विभीषण को भी अजर अमर रहने का वरदान मिला है… हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार रावण वध के बाद श्री राम ने विभीषण को लंका का राजा घोषित कर राज्याभिषेक किया था… इसके अलावा भगवान ने विभीषण पर कई और कृपाएं भी बरसाई थीं…

दरअसल, रामजी को लंका की चढ़ाई के दौरान रावण खेमे के तमाम योद्धाओं को समाप्त करने में उसके छोटे भाई विभीषण की जानकारियां काफी काम आईं थीं… इसी कारण उसे घर का भेदी होने का अपयश भी मिला…

माना जाता है कि भगवान राम की जीत विभीषण बिना सम्भव नहीं थी और यही कारण था कि राम जी ने विभीषण को लंका नरेश बनाने के साथ अजर-अमर होने का वरदान भी दिया था… मित्रों, विभीषण सप्त चिरंजीवियों में एक हैं और अभी तक इस संसार में सशऱीर विद्यमान हैं…

3. काकभुशुण्डि

मित्रों… काकभुशुण्डि रामायण काल के वो तीसरे शख्स हैं… जो आज भी जीवित हैं… सबसे पहले तो बता दूं कि काकभुशुण्डि अपने गुरु लोमश ऋषि के शार्प के कारण काक में परिवर्ति हो गए थे…

हालांकि जब बाद में लोमश ऋषि को पश्चाताप हुआ तो उन्होंने काकभुशुण्डि को बुलाया और शाप से मु‍क्त होने के साथ ही राम मंत्र दिया… इसके अलावा उन्होंने काकभुशुण्डि को इच्छामृत्यु का वरदान भी दिया…

कहा जाता है कि काक का शरीर पाने के बाद और राममंत्र मिलने के कारण उन्हें अपने शरीर से प्रेम हो गया… और उन्होंने कभी इसका त्याग नहीं किया और आज भी काकभुशुण्डि कौए के रूप में ही रहते हैं…

4. लोमश ऋषि

मित्रों… काकभुशुण्डि को श्राप देने वाले और उनके गुरू  लोमश ऋषि को भी अमरता का वरदाम मिला था… दरअसल, लोमश ऋषि परम तपस्वी और विद्वान थे… पुराणों में भी इनके अमर होने का उल्लेख मिलता है…

वहीं हिन्दू महाकाव्य महाभारत के अनुसार ये पाण्डवों के ज्येष्ठ भ्राता युधिष्ठिर के साथ तीर्थयात्रा पर गए थे और उन्हें सब तीर्थों का वृत्तान्त बताया था..

यहां पर ये भी बता दूं कि  लोमश ऋषि को अमर होने का वरदान भगवान शिव से दिया था… जिसके अनुसार लोमश ऋषि की मृत्यु उनकी इच्छा के अमुसार ही हो सकती है… कहा जाता है कि आज भी लोमश ऋषि सशरीर जीवित हैं… और कहीं दूर पहाड़ियों पर निवास करते हैं…

5. जामवंत

मित्रों… विभीषण के अलावा अग्नि के पुत्र जामवंत को भी भगवान श्री राम ने सदा जीवित रहने का वरदान दिया था… माना जाता है कि देवासुर संग्राम में देवताओं की सहायता के लिए जामवन्त का जन्म ‍अग्नि के पुत्र के रूप में हुआ था… उनकी माता एक गंधर्व कन्या थीं…

और सतयुग में जामवन्त का जन्म हुआ था… जामवन्त ने अपने सामने ही भगवान विष्णु का वामन अवतार देखा था… यही नहीं वो राजा बलि के काल में भी थे…

6. मुचुकुन्द

मित्रों… मान्धाता के पुत्र मुचुकुंद त्रेतायुग में इक्ष्वाकु वंश के राजा थे और  मुचुकुन्द की पुत्री का नाम शशिभागा था… हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलने वाली एक कथा के अनुसार  एक बार देवताओं के बुलावे पर देवता और दानवों की लड़ाई में मुचुकुंद ने देवताओं का साथ दिया था जिसके चलते देवता जीत गए थे… 

जीत से प्रसन्न देवराज इन्द्र ने मुचुकुन्द से वर मांगने को कहा… जिसपर उन्होंने वापस पृथ्वीलोक जाने की इच्छा व्यक्त की.. कहते हैं कि तब इन्द्र ने उन्हें बताया कि पृथ्वी पर और देवलोक में समय का बहुत अंतर है जिस कारण अब वो समय नहीं रहा और सब बंधू मर चुके हैं उनके वंश का कोई नहीं बचा…

ये जानकर मुचुकंद दुखी हुए और वर मांगा कि उन्हें सोना है… तब इन्द्र ने वरदान दिया कि किसी निर्जन स्थान पर सो जाए और यदि कोई उन्हें उठाएगा तो मुचुकंद की दृष्टि पड़ते ही वो भस्म हो जाएगा.. और मित्रों आजतक मुचुकंद कहीं गहरी नींद में सोए हुए हैं…

7. परशुराम

मित्रों.., भगवान विष्णु के छठे आवेश अवतार परशुराम के बारे में भी यही कहा जाता है कि वो आज भी जीवित हैं… त्रैतायुग से द्वापर युग तक परशुराम के लाखों शिष्य थे… आपने भी रामायण के अलावा महाभारत काल में भगवान परशुराम के बारे में सुना होगा..

कहा जाता है कि उनके कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें कल्प के अंत तक जीवित रहने का वरदान दिया था… ऐसी मान्यता भी है कि भगवान परशुराम भगवान विष्णु के अंतिम कल्कि अवतार के समय फिर से उपस्थित होंगे…

तो मित्रों ये थे रामायण काल के वो 7 लोग जो आज भी जीवित हैं… उम्मीद करता हूं आपको ये वीडियो पसंद आई होगी… इसी के साथ अब मुझे दें इजाजत… मैं फिर लौटूंगा ऐसी ही कुछ और धार्मिक जानकारियों के साथ… तबतक के लिए  अपना और अपने चाहने वालों का ख्याल रखें… धन्यवाद…

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