शिव की नगरी वाराणसी का कोतवाल

दोस्तों काशी के बारे में कहते है.. ये नगरी कब से यहां पर है ये किसी को नहीं पता… लेकिन ये जब से है तब से यहां का सिर्फ एक ही राजा है और वो है त्रिलोक के स्वामी महादेव… मान्यता है कि उनकी मर्जी के बिना वहां कुछ नहीं होता..
लेकिन क्या आप ने काशी के कोतवाल के बारे में सुना है.. आखिर कौन है वो
दरअसल, बाबा शिव की नगरी कही जाने वाली वाराणसी का कोतवाल कोई और नहीं, बल्कि काल भैरव है… काशी की देख- रेख और सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर है.. इसलिए वहां पर काशी विश्वनाथ के दर्शन से पहले उनके दर्शन किये जाते है…
कहा जाता है कि उस व्यक्ति को शिव जी के दर्शन का फल नहीं मिलता जो काल भैरव के दर्शन कर के उनका आशीर्वाद नहीं लेता… और ये सारी जिम्मेदारी उन्हें किसी और ने नही बल्कि खुद महादेव ने दी है।
पर सोचने वाली बात है कि इस जगह कि जिम्मेदारी खास उन्हें ही क्यों दी गयी..
मान्यता है कि पहले ब्रह्मा जी के चार नहीं बल्कि पांच मुंह थे… लेकिन एक बार उनका एक मुंह शिव जी को अपशब्द कहने लगे… बोलते- बोलते जब ब्रह्मा जी ने सारी हदें पार कर दी तो महादेव के सब्र का बाँध टूट गया और वो अत्यंत क्रोधित हो उठे.. क्रोध में आकर उन्होंने अपने बाल की एक लट जमीन पर जोर से पटक दी.. जिससे काल भैरव प्रकट हुये…
काल भैरव का क्रोध इतने चरम पर था कि उन्होंने अपने नाखूनों से ब्रह्मा जी का वो मुंह धड़ से अलग कर दिया जो महादेव को उल्टे- सीधे शब्द कर रहा था.. लेकिन बाबा काल भैरव के हाथ से ब्रह्मा जी का वो सिर चिपक गया और साथ ही उन्हें ब्रह्म हत्या का दोष भी लगा।
तब शिव जी ने उन्होंने बताया कि ब्रह्म हत्या के इस दोष से छुटकारा पाने के लिए आपको तीनों लोकों में भ्रमण करना होगा.. और जहां पर ब्रह्मा जी का ये सिर आपके हाथ से छूट जाये वहीं आपको इस दोष से मुक्ति मिल जायेगी… महादेव का आदेश पाकर काल भैरव भ्रमण के लिए पैदल निकल लिये… सब जगह घूम कर जब बाबा काल भैरव काशी के गंगा तट पर पहुंचे तो उनके हाथ में चिपका भगवान ब्रह्मा का पांचवा सिर छूट गया…
और उन्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिल गयी… बाबा काल भैरव को जैसे ही इस पाप से छुटकारा मिला वैसे ही वहां शिव जी प्रक्रट हो गये… उन्होंने काल भैरव को वहीं रुक कर तपस्या करने का आदेश दिया… इतना ही नहीं उन्होंने काल भैरव को ये आशीर्वाद भी दिया कि आज से इस नगरी के कोतवाल तुम कहलाओं और युगो- युगों तक यहां इसी रुप में पूजे जाओगे…
तभी से काल भैरव इस नगरी में रह रहे हैं… उनकी इजाज़त के बिना यमराज किसी के प्राण तक यहां से नहीं ले जा सकते… कहते है वो जिस जगह पर रहते थे उसी स्थान पर काल भैरव का मंदिर स्थापित है।
वैसे आपको बता दें काल भैरव को शिव जी का पांचवा अवतार माना जाता है।
दोस्तों अब आपको बाबा काल भैरव से जुड़ी कुछ और रोचक बातें बतातें हैं..
मान्यता है कि काल भैरव के सिर्फ दर्शन करने से ही शनि की साढ़े साती, शनि दंड, और ढ़ैय्या से बचा जा सकता है… इतना ही नहीं यहां पर दंड देने के अधिकार भी सिर्फ महादेव और बाबा काल भैरव को ही है… यहां के इंसानों को दंड देने का अधिकार यमराज के पास भी नहीं है।
कहते हैं जब भी कोई अधिकारी काशी में अपना पद संभलता है… तो उसे सबसे पहले बाबा भैरव के मंदिर जाकर वहां हाजरी लगानी होती है.. इसके बाद ही वो अपना काम शुरु करता है… इतना ही नहीं वहां रहने वाले लोगों का ये मानना है कि इस मंदिर के पास जो कोतवाली है, उसका निरीक्षण खुद काल भैरव करते हैं।
काशी में भैरव बाबा अपने आठ रुपों में विराजमान है… दण्डपाणी भैरव, क्षेत्रपाल भैरव, लाट भैरव जैसे कुल आठ रूप आपको काशी में अलग- अलग जगहों पर देखने को मिल जायेंगें।
आपको बता दें, साल 1715 में बाजीराव पेशवा ने काल भैरव मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया था… कहते है ये मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार बनवाया गया था और ये आज भी वैसे का वैसा ही है… स्थानीय लोगो का कहना है कि काशी के रक्षक बाबा कालभैरव ही है।
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