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पौराणिक काल के 5 ऐसे श्राप जिनका प्रभाव मनुष्यों पर आज भी है | Curses From Mythological Period

by Aejaz
पौराणिक काल के 5 ऐसे श्राप जिनका प्रभाव मनुष्यों पर आज भी है

मित्रों, आपने पौराणिक काल के बहुत से ऐसे श्रापों के बारे में पढ़ा या  सुना होगा जिसे आज भी मनुष्य जाति  परन्तु आज मैं आपको उस काल के  श्रापों के बारे में बताने जा रहा हूँ जिससे भगवान शिव भी ना  बच सके और आज भी वो उस श्राप को भुगत रहे हैं। तो आइये मिलकर  पौराणिक काल के 5 ऐसे रोचक श्राप के बारे में। 

नमस्कार मित्रों आपका स्वागत है The Divine Tales पर….

हिंदू ग्रंथों के अनुसार समय-समय पर भगवान को भी श्राप झेलना पड़ा है। उन्हीं श्रापों में से एक है…..

भोलेनाथ को ऋषियों ने दिया श्राप

मित्रों, क्या कभी आपने सोचा है कि शिव जी को लिंग अर्थात शिवलिंग के रूप में क्यों पूजा जाता है…. अगर नहीं तो बता दें कि इसके पीछे भी एक कारण है। 

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है भगवान शिव दारु वन में ऋषियों के साथ रहने के लिए आये। उस वन रहने वाले ऋषि मुनियों की पत्नियां भी उनके साथ ही रहती थी। और भगवान शिव जब वहां पहुंचे तो उन ऋषि मुनियों की पत्निया शिव के रूप को देखकर उनपर मोहित हो गई। यह बात जब उन ऋषि मुनियों को पता चली तो उनलोगों भगवान शिव को सबक सीखने का फैसला किया। वह सभी यह तो जानते थे की वह सामने से भगवान शिव का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते इसलिए उन्होंने शिव पर हमला करने  के लिए बाघ जैसे हिंसक पशु को भेजा। लेकिन कहते हैं कि जिसने स्वंय बाघ के छाल को  रखा हो उसका बाघ क्या ही बिगाड़ सकता है। भगवान शिव को देखते ही सभी हिंसक पशु उन्हें प्रणाम कर उलटे पैर अपने अपने निवास स्थान को लौट गए। 

यह देख ऋषि मुनियों ने भगवान शिव को श्राप देते हुए कहा हे शिव जैसे आपने हम सभी की  पत्नियों को स्वंय के प्रति आकर्षित होने को मजबूर किया है इसलिए आपका लिंग इसी समय आपके शरीर से अलग हो कर जमीन पर गिर जाए। इतना कहते ही भगवान शिव का लीन जमीन पर आ गिरा और लिंग के गिरते ही जमीन कांपने लगी ऐसा लगाने लगा मानो भूकंप आ गया हो। यह देख वहां उपस्थित ऋषि मुनि भय से कांपने लगे और सभी शिव के चरणों में झुक गए। फिर उनलोगों ने भगवान शिव से अपनी इस गलती के लिए क्षमा मांगी। और शिवजी तो हैं ही दयालु उन्होंने भी उन ऋषि मुनियों को क्षमा कर दिया। ऐसा माना जाता है इसी श्राप की वजह से शिवजी के लिंग को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। 

द्रौपदी ने कुत्तों को दिया श्राप

मित्रों, क्या आप जानते हैं…. संभोग के दौरान कुत्तों का चिपकना भी एक श्राप ही है। यह श्राप किसी और ने नहीं बल्कि पांचों पांडवों की पत्नी द्रोपदी ने ही कुत्तों को दिया था। इस बात से बहुत कम ही लोग वाकिफ हैं। जैसे की आप जानते कि द्रौपदी 5 पांडव पतियों की पत्नी थी। 

द्रौपदी संग समय बिताने के लिए पांडवों ने एक नियम बना रखा था , जिससे कि उन्हें एक दूसरे से किसी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने तय किया था कि जब भी कोई भाई द्रौपदी के कमरे में दाखिल हो, तो वह दरवाजे पर ही अपनी जूतियां उतार दे, ताकि बाकी लोगों को भी यह पता चल जाए कि द्रौपदी अकेली नहीं है।

एक दिन एक भाई बाहर दरवाजे पर अपनी जूतियां उतारकर तो भीतर चला गया। मगर वहां से गुजर रहा एक कुत्ता खेल-खेल में वहां रखी जूतियां उठाकर ले गया। तभी दूसरे भाई ने देखा की दरवाजे पर जूते नहीं है तो वो कमरे के अंदर चला गया। जिससे एक शर्मिंदाजनक स्थिती बन गई। 

और द्रौपदी कोजब यह पता चली की यह सब एक कुत्ते की वजह से हुआ है तो उसने सभी कुत्तों को श्राप दिया कि वो भी उसी की तरह शर्म का सामना करेंगे जैसे मुझे और मेर पतियों को करना पड़ा। तब से संभोग के बाद कुत्ते खुले में सहवास करते हैं और एक दूसरे से जुड़े रहते है।हालाँकि हम इस कथा को प्रमाणित नहीं करते हैं। 

तोते ने दिया माता सीता को श्राप

धर्म के ग्रंथों में बताया गया है कि बुरे कर्मों का फल हमेशा बुरा ही मिलता है, चाहें वह इंसान हो या फिर ईश्वर। रामायण कई भाषाओं में लिखी गई है। अलग-अलग रामायण में कई तरह की दंत कथाएं मिलती हैं, जिनसे कई लोग परिचित नहीं हैं। 

एक कथा में बताया गया है कि एक बार माता सीता अपने बाल्यावस्था में अपनी सहेलियों के साथ बगीचे में खेल रही थीं। वहीं बगीचे में एक तोता का जोड़ा पेड़ पर बैठा था। तोता का जोड़ा भगवान राम और माता सीता के बारे में बातें कह रहा था।

माता सीता अपने भविष्य के बारे में और जानना चाहती थीं। उन्होंने अपनी सखियों से कहकर दोनों पंक्षियों को पकड़ लिया। सीताजी ने कहा कि वो जानकी नंदन पुत्री मैं ही हूं….जब तक मेरा विवाह नहीं हो जाता तुम दोनों मेरे साथ राजमहल में रहोगे और तुम वहां सारी सुख-सुविधाएं मिलेंगी। 

नर तोता ने कहा हे जनक पुत्री, हम गगन के पंक्षी हैं इसलिए पिंजरे में बंद रहकर हम जीवित नहीं रह पाएंगे। इसलिए हमको आजाद कर दीजिए। नर तोता ने कहा कि मेरी पत्नी गर्भवती है इसलिए ऐसे समय पर उसको जानें दें। हम दोनों एक-दूसरे का वियोग सहन नहीं कर सकते इसलिए आप मेरी पत्नी को जानें दें। 

लेकिन सीताजी ने उसकी एक न सुनी। इस पर मादा तोता को बहुत गुस्सा आया और श्राप दिया कि जिस तरह तुमने गर्भावस्था में मेरे पति से मुझको अलग कर दिया है, वैसे ही गर्भावस्था के दौरान तुमको भी पति वियोग सहना पड़ेगा। इतना कहते ही मादा तोता ने अपने प्राण त्याग दिए।

नारद ने विष्णु जी को दिया श्राप

शिवपुराण में बताया गया है कि एक बार नारदजी लक्ष्मी जी के स्वयंवर में पहुंच गए। कहा जात है कि नारदजी भी माता लक्ष्मी पर मोहित थे। स्वयंवर में भगवान विष्णु भी पहुंचे थे। महार्षि नारद को वहां देखकर विष्णुजी ने उनका मुंह वानर के रूप में बदल दिया। जिसके बाद लक्ष्मी जी ने विष्णुजी को वर के तौर पर चुना।

 क्रोधित महार्षि नारद ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस तरह मैं स्त्री के लिए व्याकुल हुआ ठीक इसी तरह आप भी स्त्री के लिए दुख भोगोगे। जिसके परिणाम स्वरूप भगवान विष्णु ने राम अवतार लिया और श्राप को पूरा किया। 

वृंदा ने दिया भगवान विष्णु को श्राप

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वृंदा नाम की एक कन्या का विवाह समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए जलंधर नामक राक्षस से हुआ था। वृंदा भगवान विष्णु की भक्त के साथ एक पतिव्रता स्त्री भी थी। इसी वजह से जलंधर और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया था।

ऐसी मान्यताएं हैं कि भगवान शिव भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद सभी देवों ने मिलकर भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने जलंधर का भेष धारण किया और पतिव्रता स्त्री वृंदा की पवित्रता नष्ट कर दी।

वृंदा की पवित्रता समाप्त होते ही जलंधर की ताकत खत्म हो गई और भगवान शिव ने जलंधर का वध कर दिया। वृंदा को जैसे ही इस का ग्यात हुआ वो क्रोधित हो गई और भगवान विष्णु को शालिग्राम बनने का श्राप दे दिया।

वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि वह भी एक दिन अपनी पत्नी से अलग हो जाएंगे। इसलिए कहा गया है कि राम के अवतार में भगवान माता सीता से अलग होते हैं. ये वृंदा के श्राप के कारण ही हुआ था।

तो मित्रों आज की इस वीडियो में बस इतना ही… हम उम्मीद करते हैं कि हमारी वीडियो के जरिए आपको कई श्रापों के बारे में जानकारी मिली होगी…. इनमें से किस श्राप के बारे में आप पहले से जानते थे… हमें comment करके जरूर बताएं…

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