होम अद्भुत कथायें पांच ऐसे विवाह उत्सव जिन्हें देखने के लिए सभी देवता भी हो गए थे उपस्थित, मन मोह लेने वाला था नजारा !!

पांच ऐसे विवाह उत्सव जिन्हें देखने के लिए सभी देवता भी हो गए थे उपस्थित, मन मोह लेने वाला था नजारा !!

by Aejaz
पौराणिक काल के 5 विवाह जिसमे शामिल हुए सभी देवी देवता

मित्रों… विवाह… उन 16 संस्कारों में से एक है… जिसे सनातन धर्म में अत्याधिक महत्व दिया गया है… ये केवल दो लोगों का मिलन ही नहीं… बल्कि दो आत्माओं, परिवारों और संस्कृतियों का भी पवित्र गठबंधन है…जिसके बाद पति और पत्नी जन्म जन्मातंर के लिए एक दूजे के हो जाते हैं…

वैसे आपने अपने जीवन में कई अनोखे और भव्य विवाह देखे होंगे…लेकिन मित्रों क्या आपने कभी ऐसे किसी विवाह उत्सव के बारे में सुना है… जिसमें देवता भी शामिल हुए हों? जरा सोचिए मित्रों… कितने भव्य रहें होंगे ऐसे विवाह उत्सव जिनमें साक्षात देवताओं ने शिरकत की होगी….

और आज इस वाडियो के माध्यम से मैं आपको हिंदू धर्म में हुए ऐसे ही 5 विवाहों के बारे में बताने जा रहा हूं… जिसमें ना सिर्फ सभी देवतागण शामिल हुए थे… बल्कि उन्हें वर वधु को अपना आशिर्वाद भी दिया था…

तो मित्रों इन भव्य विवाह उत्सवों के बारे में जानने के लिए मेरे साथ इस वीडियो की अंत तक बने रहिए…

तो मित्रों नमस्कार और स्वागत है आप सभी का एक बार फिर the divine tales पर… ऐसे विवाह उत्सवों के बारे में जानने से पहले जरा ये समझ लेते हैं कि आखिर हिंदू धर्म में विवाह के मायने क्या हैं?

सबसे पहले तो बता दूं कि हिंदू धर्म में कुल सोलह संस्कार होते हैं… जिनमें से विवाह संस्कार को 15वां स्थान दिया गया है… कहा जाता है कि इस संस्कार के बाद ही कोई व्यक्ति अपने पितृ ऋण से मुक्ति पाता है…

अगर विवाह का मूल अर्थ देखा जाए… तो विवाह शब्द में ‘वि’ का अर्थ होता है विशेष और वाह का अर्थ वहन करने से होता है… अर्थात उत्तरदायित्व को विशेष रुप से वहन करना ही विवाह कहलाता है…

मित्रों चलिए अब उन 5 भव्य विवाहों के बारे में भी जान लेते हैं जिनमें समस्त देवतागण शामिल हुए थे..

1. शिवपार्वती विवाह

मित्रों… भगवान शिव और देवी पार्वती को दांपत्य जीवन के आदर्श के तौर पर देखा जाता है… और तो और मनचाहे वर के लिए भी लड़कियां 16 सोमवार के व्रत रखती हैं…

लेकिन क्या आप जानते हैं कि शुरू में भोलेनाथ माता पार्वती से विवाह करने के लिए तैयार नहीं थे… और वो अपनी तपस्या में इस कदर लीन थे कि उन्हें माता पार्वती की तपस्या भी दिखाई नहीं दे रही थी…

अब क्योंकि उस समय तारकासुर नाम के एक असुर को भगवान शिव की संतान ही मार सकती थी… इसलिए सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई थी…

कहा जाता है कि जब महादेव की बारात निकली थी तो उसमें देवता, दानव, गण, जानवर सभी शामिल हुए थे… इसके अलावा भगवान शिव की बारात में भूत पिशाच भी पहुंचे थे.. जिसे देख पार्वती जी की मां बहुत डर गईं थीं… और उन्होंने ऐसे वर को अपनी पुत्री को सौंपने से इनकार कर दिया था…

जिसके बाद देवताओं ने भगवान शिव को परंपरा के अनुसार तैयार किया… उनका सुंदर तरीके से श्रृंगार किया  और फिर इस तरह सभी देवताओं के बीच भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के पवित्र बधन में बंध गए थे…

2. गणेशरिद्धी-सिद्धी विवाह

माता पार्वती और भोलेनाथ के पुत्र भगवान गणेश को हर शुभ कार्य से पहले पूजा जाता है… विवाह हो या फिर कोई अनुष्ठान, सभी देवताओं में भगवान गणेश प्रथम पूज्यनीय हैं…

वैसे हर कोई ये तो जानता है कि गणेश जी की दी दो पत्नियां हैं रिद्धी और सिद्धी… लेकिन उनके विवाह की रोचक कथा से ज्यादातर लोग अनजान ही हैं…

मित्रों… कथाओं में उल्लेख मिलता है कि भगवान गणेश ब्रम्हचारी रहना चाहते थे. लेकिन उनका ये संकल्प टूट गया और उनके एक नहीं बल्कि दो विवाह हुए…

पौराणिक कथा के अनुसार बनावट के चलते जब गणेशजी के विवाह में देरी होने लगी और कोई भी उनके साथ विवाह करने को तैयार नहीं था वो क्रोध में आ गए और देवताओं के विवाह में बाधा डालने लगे…

गणेश जी के इस कार्य से सभी देवता परेशान रहने लगे… जिसके बाद सभी देवतागण ब्रह्माजी के पास पहुंचे…. तब ब्रह्माजी ने अपनी दो मानस पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को गणेश जी के पास भेजा…

रिद्धि और सिद्धि गणेशजी को शिक्षित करने लगीं… जब भी गणेश जी के पास शादी की खबर आती रिद्धि और सिद्धि उनका ध्यान भटका देतीं…

इस प्रकार से देवताओं के विवाह बिना विघ्न के संपंन होने लगे… इससे गणेशजी को और क्रोध आने लगा,,, फिर एक दिन ब्रह्मा जी ने गणेश जी के सामने रिद्धि-सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव रखा… जिसे भगवान गणेश ने स्वीकार कर लिया और फिर इस प्रकार सभी देवताओं की मौजूदगी में भगवान गणेश का रिद्धि और सिद्धि से विवाह संपन्न हुआ…

3. विष्णु-लक्ष्मी विवाह

मित्रों… जैसा कि हम सभी जानते हैं मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुंद्र मंथन से हुई थी… जिसके बाद असुरों ने माता लक्ष्मी पर अपना अधिकार जताया है… और फिर ब्रह्मा जी ने माता लक्ष्मी के स्वयंवर का ऐलान किया था…

जिसके बाद माता लक्ष्मी के स्वयंवर का आयोजन किया गया… जिसमें असुरों और देवताओं सभी ने भाग लिया… लेकिन माता लक्ष्मी तो पहले से ही भगवान विष्णु को अपना पति मान चुकी थीं… ऐसे में वो सिर्फ उन्हीं से विवाह करना चाहती थीं…

स्वयंवर में भगवान विष्णु उपस्थित नहीं थे… जिस वजह से माता लक्ष्मी बेचैन हो रहीं थी… तभी असुरों के राजा ने माता लक्ष्मी से कहा कि ये माला मेरे गले में डाल दो… और हमेशा के लिए मेरी हो जाओ…

लेकिन तभी भगवान विष्णु स्वयंवर में पहुंच गए… और माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के गले में पुष्पों की माला डाल दी… और इस तरह से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्वयंवर संपन्न हुआ…

4. राम-सीता विवाह

मित्रों… राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक शर्त रखी थी, कि जो भी उनके पास मौजूद शिव धनुष को उठाएगा उसका विवाह वो अपनी पुत्री से कराएंगे… जिसके बाद कई राजा महाराजा और देवता माता सीता के स्वयंवर में शामिल हुए थे…

लेकिन सभी नाकाम रहे… जिसके बाद भगवान राम ने उस धनुष को उठाकर उसपर प्रत्यंचा चढ़ाई और स्वयंवर को जीत लिया… फिर सीता से उनका विवाह हुआ… जिसमें सारे देवी देवता भी दर्शक के रूप में उपस्थित हुए थे…

5. श्री कृष्ण- रुक्मणी विवाह

भगवान श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम आता है.. भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं में ये भी दिखाया था कि राधा और श्रीकृष्ण दो नहीं बल्कि एक हैं… लेकिन देवी राधा के साथ श्रीकृष्ण का लौकिक विवाह नहीं हुआ था… देवी राधा के बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय देवी रुक्मणी हुईं…

मित्रों महाभारत की कहानी में भगवान् श्री कृष्ण और रुक्मणी के विवाह की रोचक कहानी का जिक्र मिलता है जिसमें कृष्ण ने रुक्मणी का हरण किया था, जिसके बाद कृष्ण और रुक्मणी का कृष्ण नगरी में खूब स्वागत हुआ था… और उनके विवाह में सभी देवी देवता भी उपस्थित हुए थे…

तो मित्रों ये थे वो 5 भव्य विवाह समारोह… जिसके साक्षी समस्त देवतागण भी बने थे… उम्मीद करता हूं आपको ये वीडियो पसंद आई होगी… इसे ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर जरूर करना… इसी के साथ अब मुझे दें इजाजत… मैं फिर लौटूंगा ऐसी ही कुछ और धार्मिक और पौराणिक जानकारियों के साथ…

तबतक के लिए देखते रहिए the divine tales….

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