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भगवान शिव ने कैसे किया था इस सृष्टि का अंत ?

by Aejaz
भगवान शिव ने कैसे किया था इस सृष्टि का अंत ?

 भगवान शिव जितने भोले हैं उनका क्रोध उतना ही विकराल है… समय-समय पर संसार ने उनके इस विकारल और भयावह रूप को देखा है… आपने भी ऐसी कई पौराणिक कथाएं सुनी होंगी जिसमें भगवान शिव के क्रोध का जिक्र हुआ होगा… लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भगवान शिव ने इस सृष्टि का अंत कर दिया था?  

नमस्कार मित्रों… आप सभी का एक बार फिर the divine tales पर… आज मैं आपको उस पौराणिक कथा के बारे में बताउंगा जिसके अनुसार भगवान शिव ने इस सृष्टि का अंत कर दिया था… अगर आप भी इसका कारण जानना चाहते हैं तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा…

मित्रों सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार ब्रह्मा जन्म, विष्णु पालन और शिव संहार के देवता हैं और सारी सृष्टि इन्हीं के द्वारा संचालित होती है…. जब-जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते आए हैं…

गीता के चौथे अध्याय क एक श्लोक में भगवान कृष्ण खुद कहते हैं कि हे भारत, जब-जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म बढ़ने लगता है, तब-तब मैं स्वयं की रचना करता हूं

अर्थात् जन्म लेता हूं... मानव की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनःस्थापना के लिए मैं अलग-अलग युगों में अवतरित होता हूं.

मित्रों अब भगवान शिव ने सृष्टि का अंत क्यों किया?  इस सवाल का उत्तर जानने से पहले ये जानना होगा कि आखिर सृष्टि का अंत करने की जरूरत क्यों आई…?

  • तो पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सृष्टि रचियेता ब्रह्मा जी ने चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का निर्माण किया… ब्रह्मदेव के निद्रामग्न होने के बाद हयग्रीवासुर नाम का एक दैत्य वेदों को चुराकर ले गया, जिससे संसार में पाप और अधर्म छा गया…
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ब्रह्मदेव जब निंद्रा से जागे तो उन्होंने पाया कि वेदों को हयग्रीवासुर चुरा ले गया है… उन्होंने ये बात भगवान विष्णु को बताई… और उनसे सहायता मांगी… जिसके बाद हयग्रीव का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने मतस्य अवतार लिया..

उधर हयग्रीव के वध के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव की सहायता ली… भगवान ने महादेव से कहा कि सृष्टि पर पाप बढ़ गया है… जिसका अंत करना जरूरी है… इसलिए भगवान विष्णु ने महादेव से आग्रह किया कि वो धरती पर जल प्लावन लेकर आएं…

भगवान विष्णु के इस आग्रह को भगवान शिव ने मान लिया… लेकिन अब समस्या ये थी कि नवजीवन को दिशा देने के लिए किसी का जीवत रहना जरूरी थी… और इस कार्य के लिए भगवान विष्णु ने राजा मनु और उनकी अरधागनी शतरूपा को चिन्हित किया…

राजा मनु और शतरूपा को इस कार्य के लिए चिन्हित करने की भी एक वजह थी… मान्यता के मुताबिक राजा मनु भगवान विष्णु के परम भक्त थे… एक बार वो सुबह के समय सूर्य नारायण को अर्घ्य दे रहे थे तभी एक मछली नें उनसे कहा कि आप मुझे अपने कमंडल में रख लें…

दया और धर्म के अनुसार इस राजा ने मछली को अपने कमंडल में ले लिया और घर की ओर निकले… घर पहुँचते तक वो मत्स्य उस कमंडल के आकार की हो गई…  राजा ने फिर मत्स्य को दूसरे पात्र में रखा और वो वो मत्स्य उसी पात्र के आकार की हो गई…

अंत में राजा ने मत्स्य को समुद्र में वापस डाल दिया… जिसके बाद मस्त्य ने पूरे समुद्र को ही ढक लिया.. राजा मनु आश्चर्य में पड़ गए… जिसके बाद उस सुनहरी रंग की मछली ने अपने दिव्य पहचान उजागर की…

दरअसल… मित्रों ये मत्स्य कोई और नहीं बल्कि भगवान विष्णु का ही अवतार था… जिससे हयग्रीव का वध होना था… भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने अपने भक्त को सूचित किया कि आज से ठीक सातवें दिन जल प्रलय आएगी… तत्पश्चात् विश्व का नया श्रृजन होगा…

भगवन ने राजा मनु को एक ऐसी नौका बनाने को कहा जिसमें वो सभी जड़ी-भूटियां, बीज पशुओं और सप्त ऋषि को रखें ताकि नवजीवन को इन सभी चीजों की प्राप्ती हो सके… उन्होंने मनु से खुद इस नौका को संचालित करने के लिए कहा…

उन्होंने मनु को ये आश्वासन भी दिया कि वो खुद इस नौका को जल प्रलय से बचाएंगे… भगवान विष्णु की आज्ञा का पालन करते हुए राजा मनु अपनी पत्नी के साथ मिलकर नौका का निर्माण करने लगे…

वहीं सातवें दिन भगवान शिव ने मां पार्वती की सहायता से अर्धनारीश्वर लिया… जिसके बाद देखते ही देखते सृष्टि में जल प्रलय आ गई… इसके बाद मत्स्य का अवतार लेकर भगवान विष्णु समुद्र के भीतर गए…

जहां उन्होंने पहले हयग्रीव के पहरेदारों को मारा और फिर हयग्रीव का भी वध कर दिया… इसके बाद भगवान विष्णु वेदों को अपने मुंह में रखकर समुद्र से बाहर ले आए और जिन्हें उन्होंने ब्रह्मा जी को सौंप दिए…

मित्रों ऐसी मान्यता है कि इस जल प्रलय के बाद इस संसार से जीवन का अंत हो गया था… सिर्फ राजा मनु, उनकी पत्नी शतरूपा और सप्त ऋषि ही थे जो इस प्रलय से जीवत बचे…  और भगवान से मिले वेद के ज्ञान के बाद राजा मनु वैवस्‍वत मनु कहलाए…  उक्त नौका में जो बच गए थे उन्हीं से संसार में जीवन चला…

तो मित्रों आज की इस वीडियो में बस इतना ही… उम्मीद है कि अब आप ये जान गए होंगे कि आखिर क्यों और कैसे भगवान शिव ने  इस सृष्टि का अंत किया था… अगर आपको ये वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा… तो इसके साथ ही अब मुझे दें इजाजत… मैं फिर लौटूंगा ऐसी ही एक और पौराणिक कथा के साथ… तबतक के लिए देखते रहिए the divine tales…   

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