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श्री राम और श्री कृष्ण के वैवाहिक जीवन के 5 सबसे बड़े अंतर

by Aejaz
श्री राम और श्री कृष्ण के वैवाहिक जीवन के 5 सबसे बड़े अंतर

मित्रों… भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने हमें जीवन जीना सीखाया है… भगवान होते हुए भी ना सिर्फ उन्होंने आम मनुष्य की तरह धरती पर जन्म लिया… बल्कि तमाम तरह के दुख भी झेले…  श्रीराम ने अपनी पत्नी सीता का वियोग सहा तो श्रीकृष्ण अपनी प्रेमिका राधा से कभी शादी नहीं रचा सके…

भले ही श्री राम और श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे लेकिन दोनों ने अलग अलग तरह से वैवाहिक जीवन जीकर हमें कई तरह के संदेश दिए हैं… और आज इस वीडियो के माध्यम से मैं आपको श्रीराम और श्रीकृष्ण के वैवाहिक जीवन के 5 बड़े अंतर के बारे में बताने जा रहा हूं… इसलिए इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा…

तो मित्रों नमस्कार और स्वागत है आप सभी का एक बार फिर the divine tales पर… उन 5 अंतरों के बारे में जानने से पहले श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की कलाओं के बारे में जान लीजिए…

दरअसल, त्रेतायुग में जन्मे भगवान श्रीराम 16 कलाओं से युक्त थे जबकि द्वापरयुग में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण को 64 कलाओं का ज्ञान था… ये वो कलाएं हैं जिसमें रूप बदलने से लेकर तमाम तरह की विद्याएं शामिल हैं…

आपने देखा होगा कि भगवान श्रीराम ने हमेशा एक ही रूप में पूरी जिंदगी गुजार दी,.. उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है लेकिन भगवान श्रीकृष्ण जरूरत पड़ने पर अपना रूप बदल लेते थे, वो अपने दिव्यस्वरूप से किसी को भी मोहित कर सकते थे, जरूरत पड़ने पर उन्होंने मानव रूप में ही सुदर्शन चक्र का भी इस्तेमाल किया है… 

क्योंकि श्रीकृष्ण का अवतार सिर्फ कंस का वध करने के लिए नहीं बल्कि महाभारत जैसे महान उपदेश के लिए भी हुआ था, वहीं श्रीराम का अवतार धरती से रावण जैसे पापी का अंत करने और पापियों का संहार करने के लिए हुआ था… 

1. विवाह

जब श्रीराम सीता से विवाह करने जनकपुर पहुंचे तो वहां उन्होंने स्वंयवर में भाग लिया, धनुष तोड़ा और फिर विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ… लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ कभी ऐसा नहीं रहा. उन्होंने सत्यभामा, लक्ष्मणा और जयंती के साथ सिर्फ विधि-विधान से शादी की और उन्होंने गंधर्व विवाह भी किया था…

अर्थात श्रीकृष्ण कभी भी सामाजिक बंधनों में बंधकर नहीं रहे, उन्हें जब जो उचित लगा, उन्होंने वैसा ही व्यवहार किया, जबकि श्रीराम हमेशा नियम को मानकर चलते थे, अपने गुरुजनों और माता-पिता की बात कभी नहीं टालते थे… और यही श्री कृष्ण और श्री राम के वैवाहिक जीवन का पहला अंतर था…  

2. पत्नी धर्म

इनके वैवाहिक जीवन का जो दूसरा सबसे बड़ा अंतर वो ये है कि श्रीराम ने हमेशा एक पत्नी धर्म का पालन किया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने सात विवाह किए, इसके अलावा उनकी 16 हजार 1 पटरानियां भी थीं… हालांकि सात विवाह करने वाले श्रीकृष्ण बचपन में गोपियों से भी रास रचाते थे और उनके रास की कई भी कहानियां हैं, जबकि श्रीराम ने हमेशा मर्यादा का पालन किया है… 

3. पत्नी वियोग

विवाह के बाद जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास पर गए तो माता सीता का रावण ने हरण कर लिया, करीब दो साल तक श्रीराम को पत्नी के वियोग में रहना पड़ा…

माता सीता के लिए लंका में एक-एक पल एक-एक साल के बराबर बीत रहा था और बाद में रावण को मारकर भगवान श्रीराम का माता सीता से मिलन हुआ… दूसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण को कभी पत्नी वियोग नहीं झेलना पड़ा… विवाह के बाद से श्रीकृष्ण ने हमेशा गृहस्थ जीवन बिताया… उनके जीवन में कभी भी इस तरह की कठिनाई सामने नहीं आई… हालांकि उन्हें अपनी अपनी प्रेमिका राधा वियोग झेलना पड़ा था…  

4. पत्नी और प्रेमिका के साथ नाम

मित्रों… वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा और चौथा अंतर ये है कि श्रीराम का नाम हमेशा माता सीता के साथ लिया जाता है… श्रीराम ने पति-पत्नी के रिश्ते की मर्यादा को परिभाषित किया है, उसे जीकर दिखाया है,.. उन्होंने ये बताया है कि कैसे पति-पत्नी के बीच मधुर संबंध होने चाहिए,.. दोनों को एक दूसरे का संकटकाल में साथ देना चाहिए,.. 

चाहे राजमहल छोड़कर जंगल जाने की परिस्थिति ही क्यों न आ जाए फिर भी पति को पत्नी का और पत्नी को पति का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. जबकि श्रीकृष्ण का नाम उनकी पत्नी के साथ नहीं बल्कि राधा के साथ लिया जाता है, जो उनसे अत्याधिक प्रेम करतीं थीं. श्रीकृष्ण ने लोगों को प्रेम करना सीखाया है, यही वजह है कि आज भी राधा कृष्ण को प्रेम की मूर्त के रूप में माना और पूजा जाता है…

5. पत्नी मृत्यु

सबसे आखिरी और पांचवां अंतर ये है कि श्रीराम के रहते ही सीता माता अपने परमधाम को प्राप्त हो गईं,.. अंतिम समय में वो धरती में समा गईं थीं… हिंदू शास्त्रों में ऐसा उल्लिखित है कि पति के रहते अगर पत्नी की मृत्यु हो जाए, वो सुहागन परमात्मा में विलीन हो जाए तो वो उसके अच्छे कर्मों का फल है… हालांकि इसे लेकर भी विद्वानों के अपने-अपने मत है.

वहीं दूसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण की सभी पत्नियां उनके परमधाम को प्राप्त होने के बाद ही मौत का आलिंगन कर सकीं… उनकी सातों पत्नियों में से हर किसी की अलग-अलग परिस्थितियों में मौत हुई.

तो मित्रों ये थे वो 5 अंतर जो हमें बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम ने किस तरह धरती पर अवतार लेकर हम मानवों को एक अच्छा इंसान बनने से लेकर गृहस्थ जीवन जीने की शिक्षा दी है,.. लेकिन अलग अलग तरह से… 

परिवारिक रिश्तों की अहमियत को समझते हुए अगर हम भगवान के बताए रास्ते पर चलें तो कभी जीवन में किसी भी तरह की बाधा नहीं आ सकती… श्रीकृष्ण ने तो ये भी संदेश दिया है कि हमारे अच्छे कर्मों से सीखो, हमने जो गलत कर्म किए, अगर उसका पालन किया तो उसकी सजा मिलनी तय है…

इसी के साथ अब मुझे दें इजाजत… मैं फिर लौटूंगा ऐसी ही कुछ और पौराणिक और धार्मिक जानकारियों के साथ… अगर वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें… और हां वीडियो को अंत तक देखने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया…

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